प्रारब्ध और संस्कार
जरा संभल जाओं, ये सब आपके साथ जाने वाले हैं
आपके जो कर्म है, अच्छे और बूरे कर्म, वो आपके साथ जायेंगे। आपके कर्म के जो कार्मिक अकाउण्ड, कर्म के हिसाब, अच्छे या बूरे, वो तो साथ जायेंगे ही। जबकि लोग अपने जीवन में सबसे ज्यादा किसी पर ध्यान नहीं देते है तो वे है कर्म। लोग अपने कर्मों पर ध्यान नहीं देते हैं।
मैं अच्छा कर्म कर रहा हूँ या बूरा कर्म कर रहा हूँ, इस पर ध्यान नहीं देते हैं। बेहोशी में बस कर्म किये चले जाते हैं। उन्हें होश नहीं है कि ये जो कर्म का हिसाब है ये तो उनके साथ जाना ही है। इन्हीं के आधार पर एक दूसरा जीवन खड़ा होना है। आपके जो संस्कार है, जो कर्म है जो आपने एकत्रित किए है, ये सब साथ जाने वाला है।
हर घटना क्रमशः घटती है, अचानक से नहीं
जो भी घटना आपके जीवन में घट रही है, उसके पीछे बहुत सारी घटनाएँ घट चुकी होती है, तब यह घटना घटित होती है। इससे आप अंदाजा लगा सकते हो कि आज आप लोग यहाँ बैठे ध्यान के बारे में सुन रहे है, मतलब आपको पात्र बना कर रखा है कि ध्यान के बारे में सुनना है। किसी को खींच कर भी लाओगे तो वह नहीं आयेगा। उसका समय नहीं आया है। उसका समय नहीं आया तो वह बोलेगा, मैं व्यस्त हूँ। मुझे क्या जरूरत है। मैं ठीक हूँ। पैसा है। व्यापार है। सबकुछ ठीक है।
आपके 'कारण शरीर' में हजारों जन्मों की स्मृतियाँ है
आपको होश नहीं है, लेकिन हजारों-हजारों जन्मों के संस्कार, कर्म आपकी चेतना में पड़े हुए है। विज्ञान भी कहता है कि कुछ भी खत्म नहीं होता है। नथिंग इज क्रिएटेड, नथिंग इज डेस्ट्रॉयड। सब कुछ ब्रह्माण्ड में रह जाता है। आपके कारण शरीर में वह सब कुछ रहता है। भूतकाल के इम्प्रेसन्स, छापें, संस्कार जन्मों-जन्मों की जो कुछ भी है, वह चेतना रहती है। आप लोग को भले शंका होगी कि रहता है कि नहीं रहता है! जैसे सामने वह बैठी है, उसकी माता-पिता को, दादा-दादी को, परदादा-परदादी को देखोगे तो उनकी मेमोरी आज भी इनमें है। उनके जैसे आँख, नाक, कान, शरीर, व्यवहार और बातचीत का तरीका उनमें आज भी है। वे रिश्तेदार दो सौ साल, सौ साल पहले आकर चले गये है लेकिन उनके गुण अभी भी इसमें है। इसी प्रकार संस्कार भी पड़े रह जाते है, ऐसा नहीं है कि खत्म हो जाता है।
घटना घटने में तुम्हारी चॉइस (पसंद) नहीं, कर्म करने में तुम्हारी चॉइस है
घटनाओं के घटने का एक ऑटोमेशन, अल्गोरिद्म होता है। सब चीजें अपने-आप घटित होती है, आपके कर्म के अनुसार। आज आप जो कुछ भी करते है, आगे चीजें निश्चित रूप से परफेक्टली आपके आज के कर्म के अनुसार ही आपके लिए तैयार होती है; घटने के लिए। चाहे आप उसे पंसद करें या ना करें। जब घटना घटेगी तब आपकी चॉइस नहीं है।
जब घटना घटती है तो आपके पास विकल्प है कि आप उसे किस मनोदृष्टि से देख रहे है। इस प्रकार, आपके पास चयन सिर्फ आपके कर्म पर है। एक बार आपने कर्म कर दिया जो भी कर्म, वह सिस्टम में चला गया। तंत्र उसको स्वीकार कर लेगा।
अपनी कृपा तुम स्वयं करते हो अपने ऊपर, अपने कर्मों के द्वारा
कृपा, तुम पर किसकी होती है? इस पृथ्वी पर अगर किसी पर किसी की कृपा होती है तो वह स्वयं है। अपनी कृपा तुम स्वयं करते हो अपने ऊपर। तुम्हारे अलावा यहां कोई नहीं होता है जो तुम पर कृपा करता है। जो जैसा कर्म करता है उस पर वैसी ही कृपा बनती है। आज अगर आप किसी गुरू के पास जाते है, बैठते है, सुनते है तो आपने यह कृपा, अपने कर्मों से खुद बना कर रखी है कि वहां तक हम पहुँचें ताकि उनका आशीर्वाद हमें मिलें।
अहंरत सेवा फाउण्डेशन लोगों के शारीरिक, मानसिक,
सामाजिक और आध्यात्मिक उत्थान के लिए समर्पित
एक गैर लाभकारी संगठन है।
लोगों के जीवन को बेहतर बनाने और प्रभावी ढंग से
कार्य जारी रखने हेतु अपना आर्थिक सहयोग प्रदान करे।
आपका योगदान सदा जनकल्याण के लिए समर्पित है।
लिंक पर क्लिक/टच करे और दान करे-
Leave a Comment